अलंकार
अलंकार (Alankar) का मतलब होता है "श्रृंगार" या "सजावट"। हिंदी साहित्य में, अलंकार का प्रयोग भाषा को सुंदर, प्रभावशाली और भावनात्मक बनाने के लिए किया जाता है।
हिंदी साहित्य में अलंकार दो प्रकार के होते हैं:
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शब्दालंकार – जब शब्दों के चयन, उनके उच्चारण, या ध्वनि के आधार पर भाषा को सुंदर बनाया जाता है।
उदाहरण: अनुप्रास, यमक, श्लेष आदि। -
अर्थालंकार – जब भाषा के अर्थ या भाव के माध्यम से सुंदरता लाई जाती है।
उदाहरण: उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा, दृष्टांत, श्लेष, विरोधाभास आदि
🔹 शब्द अलंकार क्या है?
जब काव्य की सुंदरता शब्दों के चयन, ध्वनि, अनुप्रास, तुक आदि के कारण होती है, तो उसे शब्द अलंकार कहा जाता है। इसमें शब्दों की मधुरता, लयात्मकता और ध्वनि विशेष पर ध्यान दिया जाता है।
जब काव्य की सुंदरता शब्दों के चयन, ध्वनि, अनुप्रास, तुक आदि के कारण होती है, तो उसे शब्द अलंकार कहा जाता है। इसमें शब्दों की मधुरता, लयात्मकता और ध्वनि विशेष पर ध्यान दिया जाता है।
शब्द अलंकार के प्रमुख भेद:
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अनुप्रास अलंकार
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एक ही वर्ण या ध्वनि का बार-बार प्रयोग।
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उदाहरण:
"चंपा चमेली चटुल चपलिता, चरन चूम चित चुरावे।"
(यहाँ 'च' ध्वनि की पुनरावृत्ति हो रही है।)
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यमक अलंकार
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एक ही शब्द की पुनरावृत्ति, लेकिन अलग-अलग अर्थ में।
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उदाहरण:
"राम नाम का मन में राम, राम बिना सब सुन।"
(यहाँ 'राम' शब्द बार-बार आया है लेकिन अर्थ भिन्न हैं।)
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श्लेष अलंकार
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एक ही शब्द से एक से अधिक अर्थ निकलते हैं।
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उदाहरण:
"नवल नवल रंग रूप नवलता, देखी नवेली नारी की।"
('नवल' शब्द से 'नया' और 'अद्भुत' दोनों अर्थ निकलते हैं।)
-
छेद अलंकार
-
शब्दों को तोड़ने पर नया अर्थ या व्यंजनार्थ निकलता है।
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(यह अलंकार प्राचीन ग्रंथों में वर्णित है और आधुनिक काव्य में कम मिलता है।)
अर्थालंकार के प्रमुख भेद निम्नलिखित हैं:
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उपमा अलंकार
जब किसी वस्तु की तुलना किसी दूसरी वस्तु से 'जैसे', 'तैसे', 'समान', 'प्रभृति' शब्दों के द्वारा की जाती है।
उदाहरण:
वह वीर रणभूमि में सिंह के समान लड़ रहा था।
-
रूपक अलंकार
जब किसी वस्तु को किसी दूसरी वस्तु के रूप में ही प्रस्तुत किया जाए।
उदाहरण:
चाँद उसका चेहरा है।
-
उत्प्रेक्षा अलंकार
जब किसी वस्तु की किसी अन्य वस्तु से तुलना इस प्रकार हो कि उसमें संभाव्यता हो।
उदाहरण:
वह कन्या मानो चंद्रमा की बहन हो।
-
उदाहरण अलंकार
जब किसी बात को प्रमाण स्वरूप सिद्ध करने के लिए उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जाए।
उदाहरण:
जैसे दीपक अंधकार में प्रकाश देता है, वैसे गुरु अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करता है।
-
संदेह अलंकार
जब किसी बात को लेकर भ्रम उत्पन्न हो कि वह क्या है।
उदाहरण:
वह मनुष्य है या देवता, कुछ समझ नहीं आता।
-
विरोधाभास अलंकार
जब विपरीत बातों को एक साथ कहा जाए।
उदाहरण:
हँसी-हँसी में रो पड़ा, वह बड़ा विचित्र व्यक्ति है।
-
वक्रोक्ति अलंकार
जब बात को व्यंग्यात्मक ढंग से कहा जाए।
उदाहरण:
बहुत ही सुंदर व्यवहार है तुम्हारा, जो सभी को रुला देता है।
-
अनन्वय अलंकार
जब उपमेय और उपमान दोनों की विशेषताएँ परस्पर एक-दूसरे में लागू न हों।
उदाहरण:
राम जैसा कोई नहीं।
-
तुलना अलंकार
जब दो या अधिक वस्तुओं की तुलना की जाती है लेकिन उपमेय और उपमान के रूप में नहीं, बल्कि समानताओं के आधार पर।
उदाहरण:
विद्या और जल दोनों की धारा एक समान होती है।
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अनुप्रास अलंकार
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एक ही वर्ण या ध्वनि का बार-बार प्रयोग।
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उदाहरण:
"चंपा चमेली चटुल चपलिता, चरन चूम चित चुरावे।"
(यहाँ 'च' ध्वनि की पुनरावृत्ति हो रही है।)
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यमक अलंकार
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एक ही शब्द की पुनरावृत्ति, लेकिन अलग-अलग अर्थ में।
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उदाहरण:
"राम नाम का मन में राम, राम बिना सब सुन।"
(यहाँ 'राम' शब्द बार-बार आया है लेकिन अर्थ भिन्न हैं।)
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श्लेष अलंकार
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एक ही शब्द से एक से अधिक अर्थ निकलते हैं।
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उदाहरण:
"नवल नवल रंग रूप नवलता, देखी नवेली नारी की।"
('नवल' शब्द से 'नया' और 'अद्भुत' दोनों अर्थ निकलते हैं।)
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छेद अलंकार
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शब्दों को तोड़ने पर नया अर्थ या व्यंजनार्थ निकलता है।
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(यह अलंकार प्राचीन ग्रंथों में वर्णित है और आधुनिक काव्य में कम मिलता है।)
अर्थालंकार के प्रमुख भेद निम्नलिखित हैं:
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उपमा अलंकार
जब किसी वस्तु की तुलना किसी दूसरी वस्तु से 'जैसे', 'तैसे', 'समान', 'प्रभृति' शब्दों के द्वारा की जाती है।
उदाहरण:
वह वीर रणभूमि में सिंह के समान लड़ रहा था। -
रूपक अलंकार
जब किसी वस्तु को किसी दूसरी वस्तु के रूप में ही प्रस्तुत किया जाए।
उदाहरण:
चाँद उसका चेहरा है। -
उत्प्रेक्षा अलंकार
जब किसी वस्तु की किसी अन्य वस्तु से तुलना इस प्रकार हो कि उसमें संभाव्यता हो।
उदाहरण:
वह कन्या मानो चंद्रमा की बहन हो। -
उदाहरण अलंकार
जब किसी बात को प्रमाण स्वरूप सिद्ध करने के लिए उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जाए।
उदाहरण:
जैसे दीपक अंधकार में प्रकाश देता है, वैसे गुरु अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करता है। -
संदेह अलंकार
जब किसी बात को लेकर भ्रम उत्पन्न हो कि वह क्या है।
उदाहरण:
वह मनुष्य है या देवता, कुछ समझ नहीं आता। -
विरोधाभास अलंकार
जब विपरीत बातों को एक साथ कहा जाए।
उदाहरण:
हँसी-हँसी में रो पड़ा, वह बड़ा विचित्र व्यक्ति है। -
वक्रोक्ति अलंकार
जब बात को व्यंग्यात्मक ढंग से कहा जाए।
उदाहरण:
बहुत ही सुंदर व्यवहार है तुम्हारा, जो सभी को रुला देता है। -
अनन्वय अलंकार
जब उपमेय और उपमान दोनों की विशेषताएँ परस्पर एक-दूसरे में लागू न हों।
उदाहरण:
राम जैसा कोई नहीं। -
तुलना अलंकार
जब दो या अधिक वस्तुओं की तुलना की जाती है लेकिन उपमेय और उपमान के रूप में नहीं, बल्कि समानताओं के आधार पर।
उदाहरण:
विद्या और जल दोनों की धारा एक समान होती है।
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